अकेला, कल मुझे मज़धार में जो छोड़ आये थे,
ज़रा देखो, उन्हें बातें बनाना भी नहीं आता
- विनोद 'निर्भय'
ज़रा देखो, उन्हें बातें बनाना भी नहीं आता
- विनोद 'निर्भय'
हमारे बीच सिलसिला क्या है| नहीं पता तो फिर पता क्या है|| नसीब आपका पढा हमने, कहो तो बोल दूँ लिखा क्या है| ...