शुक्रवार, 23 फ़रवरी 2018

शोख़-चंचल हवा की रवानी हो तुम



शोख़-चंचल   हवा   की   रवानी  हो तुम
एक   दिलकश-हसीं   रातरानी   हो  तुम

इस   तरह   से   ख़ुदा   ने    तराशा तुम्हें
क्या   कहूँ तुमसे  कितनी सुहानी हो तुम

हर   कोई    चाहता   है   पढे   ग़ौर    से
सर से लेकर  क़दम  तक कहानी हो तुम

मुश्तहर   हो   ज़माने   में तुम  आजकल
हुश्न   के   मुल्क   की   राजधानी हो तुम

आज  'निर्भय' को तुझमें ख़ुदा मिल गया
लग   रहा  जैसे आँखों का  पानी हो तुम

                                - विनोद 'निर्भय'



हमारे बीच सिलसिला क्या है

हमारे  बीच  सिलसिला  क्या  है|  नहीं  पता तो  फिर पता क्या है|| नसीब    आपका     पढा   हमने, कहो तो  बोल  दूँ लिखा  क्या है|  ...