शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

सत्य से पड़ने लगा जब वास्ता



सत्य से  पड़ने  लगा  जब वास्ता
फ़ितरती लोगों ने बदली आस्था

लीक पर चलना  मुझे भाया नहीं,
ढूंढने   निकला  नया  इक  रास्ता

बात को सुनकर किए हो अनसुनी,
क्या  सुनाऊँ   आपको  मैं  दास्ताँ

न्याय  को  जाऊँ  बताओ मैं कहाँ,
हर   जगह   देना   पड़ेगा   नास्ता

मंजिलें  विश्राम हैं औ'  कुछ  नहीं,
ज़िन्दगी    का   नाम  दूजा  रास्ता

गुण-चना,शरबत की बातें और थीं,
आज    का  फ़ैशन  है मैगी-पास्ता

                      - विनोद निर्भय  

गुरुवार, 21 सितंबर 2017

तुम बिन सावन आना कैसा

तुम  बिन   सावन  आना  कैसा
फूलों  का   खिल   जाना  कैसा

इश्क़  वही  जो  रुह  को  छू ले
काया   का   छू    जाना   कैसा

मैं  तेरा    हमदम    हूँ  तो फिर,
क़ातिल    क्यूँ    बेगाना   कैसा

आज  तुम्हें    आना   ही  होगा,
मुझसे    शर्म  - बहाना    कैसा

हद  में   रहना   जिसको  भाये,
शम्मा    क्या    परवाना   कैसा

दिल हो जिसके वश में 'निर्भय'
शायर    क्या    दीवाना   कैसा

                 - विनोद निर्भय 

गुरुवार, 14 सितंबर 2017

अगर संघर्ष के तल पर उतर पाओ, उतर जाओ

अगर  संघर्ष  के  तल  पर   उतर   पाओ, उतर जाओ
जो सोने की तरह  तपकर निखर पाओ, निखर जाओ

सिखाया  बाज  ने  मुझको,  अगर  शुरुआत करनी हो,
पुराने   पंख   को   अपने  कुतर  पाओ,  कुतर  जाओ

बड़ों  की   बात  पर  इतना  बिफरने  की  ज़रुरत क्या,
पड़े  जब  डाँट  हँसकर  के  गुज़र  पाओ, गुज़र जाओ

ये   जीवन   एक   अवसर   है,  इसे यूँहीं  न   जाने दो,
ज़हन में  ख़्वाब  ऊँचा  रख  सँवर  पाओ, सँवर जाओ

मैं  तुमसे ये  नहीं  कहता  कि  सागर  ही बनो 'निर्भय',
जो दरिया बन  के खेतो में बिखर पाओ, बिखर जाओ

                     
                                           - विनोद निर्भय 

हिंदी

सूर-तुलसी के संग पली हिंदी
कच्ची-पक्की डगर चली हिंदी
सोरठा, छन्द, पद, सवैया थी,
गीत-ग़ज़लों में भी ढली हिंदी

                   - विनोद निर्भय 
                   14 सितम्बर 2017

हमारे बीच सिलसिला क्या है

हमारे  बीच  सिलसिला  क्या  है|  नहीं  पता तो  फिर पता क्या है|| नसीब    आपका     पढा   हमने, कहो तो  बोल  दूँ लिखा  क्या है|  ...