कब तलक यूँ मुझे आजमाएगा ग़म
देखना एक दिन हार जाएगा ग़म
राज दिल में दबाकर रखा हूँ अभी,
खोल दूँ तो कहाँ सर छुपाएगा ग़म
दर्द दिल में छिपा रोज रखता गया,
क्या पता था कि घायल बनाएगा ग़म
कोशिशें कर रहा और होगा यही,
आज या कल सही मुस्कुराएगा ग़म
कारवाँ रोककर जो खड़ा आज है,
कल उसे खींचकर साथ लाएगा ग़म
हाथ यूँहीं पकड़कर चलो तुम, प्रिये!
साथ पाकर हृदय भूल जाएगा ग़म
देखना एक दिन हार जाएगा ग़म
राज दिल में दबाकर रखा हूँ अभी,
खोल दूँ तो कहाँ सर छुपाएगा ग़म
दर्द दिल में छिपा रोज रखता गया,
क्या पता था कि घायल बनाएगा ग़म
कोशिशें कर रहा और होगा यही,
आज या कल सही मुस्कुराएगा ग़म
कारवाँ रोककर जो खड़ा आज है,
कल उसे खींचकर साथ लाएगा ग़म
हाथ यूँहीं पकड़कर चलो तुम, प्रिये!
साथ पाकर हृदय भूल जाएगा ग़म