रविवार, 5 अगस्त 2018

कहीं सूरज चमकता तो कहीं काली धटाएँ हैं

कहीं   सूरज  चमकता  तो कहीं काली  घटाएँ   हैं|

यही  दो   ज़िन्दगी   की  ख़ूबसूरत  सी  अदाएँ  हैं||

किसी के पास दौलत है, किसी के पास है शोहरत,

किसी  के  पास  पूँजी  में  महज़ दोनों भुजाएँ   हैं|



                                           - विनोद निर्भय

हमारे बीच सिलसिला क्या है

हमारे  बीच  सिलसिला  क्या  है|  नहीं  पता तो  फिर पता क्या है|| नसीब    आपका     पढा   हमने, कहो तो  बोल  दूँ लिखा  क्या है|  ...