" भारत "
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प्रकृति की गोद में खेला,हुआ बड़ा भारत
युगों की याद समेंटे, अभी खड़ा भारत
कबीर , बुद्ध , दयानन्द , जायसी , नानक
अनेक पंथ के गहनों का है घड़ा भारत
सुभाष चन्द्र ने ललकार कर पुकारा तो,
लहू को हाथ में लेकर के चल पड़ा भारत
भगत था नाम, क्रुर राजतंत्र को खटका
उसी की सोच थी, चट्टान बन अड़ा भारत
अहिंसा-सत्य का परचम उठा लिया 'निर्भय'
चला तो फिर कभी पीछे नहीं मुड़ा भारत
