शनिवार, 23 मार्च 2019

दो तरफ हो चित वही सिक्का उछाला जाएगा

दो तरफ  हो चित वही  सिक्का  उछाला जाएगा|
और  पट   पे  फिर  मुझे  उल्लू  बनाया जाएगा||
नेकियाँ  भी  कम  नहीं   मेरी  मगर   होगा  यही,
इक कमी को खोजकर फतवा  सुनाया  जाएगा|


                 - विनोद 'निर्भय'


बुधवार, 20 मार्च 2019

सत्य नहीं जलता

भले-बुरे  सारे  अनुभव  होते   रंगों   के  जैसे   ही  
केवल एक रंग  से तो जीवन में फाग नहीं फलता 

            सात  रंग  से  मिलकर  सूरज
            रंग   -   कलश      कहलाता|  
            भीग दिव्य किरणों से जिसके 
            धन्य     जगत      हो  जाता||

दीपक से अँधियारा पिघले,कोहरा घोर नहीं छँटता
केवल एक रंग  से तो जीवन  में फाग नहीं फलता 
 
              मौसम    के   हैं    रंग   कई,
              सबका   जीवन   से   नाता|
              कोई       बर्षा      के     तो  
              कोई  गुण  बसंत  के गाता||
  
पतझड़  से न  गुज़रे  उन  वृक्षों पे  बौर नहीं लगता
केवल  एक रंग  से तो जीवन  में फाग नहीं फलता 
 
              बैठ  गया   प्रहलाद  गोद में
              नहीं    ख़ौफ़  था   मन   में|
              मगर होलिका जल जाती है
              अपने    द्वेष    अगन     में||

कहने को सन्मति जलती है,लेकिन सत्य नहीं जलता
केवल  एक रंग  से तो  जीवन  में  फाग  नहीं फलता 
 
                   

                            - विनोद 'निर्भय'


शुक्रवार, 15 मार्च 2019

मुक्तक : आँधियोंं में वही टिका होगा!

आँधियों  में  वही   टिका  होगा
जो कि बुनियाद से जुड़ा  होगा
रंग   छोड़ेगा  एक  दिन  तय हैं
धातु  पीतल का ग़र  मढा होगा


             - विनोद 'निर्भय'

शनिवार, 9 मार्च 2019

"साक्ष्य और कोरे तथ्य"

थी आज्ञा  रघुनंदन की , तो बानर दल का था आह्वान 
सीता जी का  पता  लगाने  सागर  पार  गये   हनुमान 

            किले   बीच   दैत्यों   का  डेरा, 
            थी    यौवन   पर   रात  घनेरी|
            मिले  सर्जिकल  करने  को तो 
            हनुमत  कब   करते  हैं   देरी?

बाग-बगीचे , महल - अटारी  हुए राख ,  रावण  हैरान
सीता जी का  पता  लगाने  सागर  पार  गये   हनुमान 

            जलधि कूद लंका तक ख़ुद तो 
            बानर       आ      न     पाएंगे|
            मुझको  दबी  ज़ुबां  से    झूठा 
            कह     के      हँसी   उड़ाएंगे||

पूँछ  बुझाते  आया  मन  में  सागर तट पे  यह  संज्ञान  
सीता जी का  पता  लगाने  सागर  पार  गये   हनुमान 

           सागर  तट   से    वापस  पहुँचे
           जनक   नन्दिनी   जी के  पास|
           चूड़ामणि   मांगा   विनती  कर
           उड़े     पुन:    ऊँचे   आकाश|| 

बिना साक्ष्य  देता  कब  कोई  कोरे  तथ्यों को सम्मान
सीता जी का  पता  लगाने  सागर  पार  गये   हनुमान 


                    ©    - विनोद 'निर्भय'





हमारे बीच सिलसिला क्या है

हमारे  बीच  सिलसिला  क्या  है|  नहीं  पता तो  फिर पता क्या है|| नसीब    आपका     पढा   हमने, कहो तो  बोल  दूँ लिखा  क्या है|  ...