थी आज्ञा रघुनंदन की , तो बानर दल का था आह्वान
सीता जी का पता लगाने सागर पार गये हनुमान
किले बीच दैत्यों का डेरा,
थी यौवन पर रात घनेरी|
मिले सर्जिकल करने को तो
हनुमत कब करते हैं देरी?
बाग-बगीचे , महल - अटारी हुए राख , रावण हैरान
सीता जी का पता लगाने सागर पार गये हनुमान
जलधि कूद लंका तक ख़ुद तो
बानर आ न पाएंगे|
मुझको दबी ज़ुबां से झूठा
कह के हँसी उड़ाएंगे||
पूँछ बुझाते आया मन में सागर तट पे यह संज्ञान
सीता जी का पता लगाने सागर पार गये हनुमान
सागर तट से वापस पहुँचे
जनक नन्दिनी जी के पास|
चूड़ामणि मांगा विनती कर
उड़े पुन: ऊँचे आकाश||
बिना साक्ष्य देता कब कोई कोरे तथ्यों को सम्मान
सीता जी का पता लगाने सागर पार गये हनुमान
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें