बुधवार, 26 सितंबर 2018

इस तरफ आँधी,उधर सैलाब भी : मुक्तक

इस   तरफ   आँधी , उधर   सैलाब  भी|

और    नयनों   में  सुनहरा   ख़्वाब  भी||

आँख   का   पानी   मरा है   जब  कहीं,

सूख    जाते     हैं   नदी  -  तालाब  भी|


              - विनोद  'निर्भय'

सोमवार, 24 सितंबर 2018

हज़ारों जंग ऐसी जीतने से हारना बेहतर : शेेर

हज़ारों    जंग  ऐसी   जीतने  से  हारना  बेहतर,

विजय के बाद जिसमें हार का एहसास होता हो


                                 - विनोद 'निर्भय'

हमारे बीच सिलसिला क्या है

हमारे  बीच  सिलसिला  क्या  है|  नहीं  पता तो  फिर पता क्या है|| नसीब    आपका     पढा   हमने, कहो तो  बोल  दूँ लिखा  क्या है|  ...