(1)
लाख टके की बात है , समझो मेरे यार|
धन से बस ख़ुशियाँ मिलें,मुश्किल पाना प्यार||
मुश्किल पाना प्यार,मिले तो कसकर पकड़ो|
पेड़ बनो फलदार , ताड़ बनकर मत अकड़ो||
सम्बन्धों में बात , करे जो हानि-नफे की|
वो निर्धन - नादान ,बात है लाख टके की||
(2)
क़ुदरत का दस्तूर है , पल-पल अनुसंधान|
बदसूरत-सुन्दर सभी , क़ुदरत के सामान||
क़ुदरत के सामान , बिना माँगे ही मिलते|
धूप-छाँव के बीच, फूल काँटों में खिलते||
देने को बेताब , नहीं लेने की हसरत|
कर्मयोग का पाठ, सहज समझाती क़ुदरत||
(3)
दुनिया की इस मूर्ति को , देखा कर के ग़ौर|
पहले तो कुछ और थी, लेकिन अब कुछ और||
लेकिन अब कुछ और , दलाली, लालच, धोखे|
झूठ बेड़ियां डाल , सत्य का रस्ता रोके||
सम्बन्धों का तौल , करे बनकर के बनिया|
उतनी सीधी नहीं , कि जितनी दिखती दुनिया||
(4)
अपने को मत कोसिए,समय दशा का मूल|
समय बिछाता फूल भी,समय चुभाये शूल||
समय चुभाये शूल , सिखाये दुनियादारी|
समय गुरु है यार , करो तुम ख़ातिरदारी||
मिल जाती है राह , अगर सच्चे हों सपने|
समय बताता कौन पराया कितने अपने||
(5)
मन सुख-दुख का श्रोत है , मन जीवन का सार|
मन से मिलती जीत तो,मन से मिलती हार||
मन से मिलती हार , यही गीता भी गाती|
मन के साधक हेतु , प्रकृति ख़ुद राह बनाती||
जीवन करता तंज , रंज से घिर जाता तन|
विचलित हो जब आप,स्वयं अपने पथ से मन||
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