शनिवार, 23 जून 2018

हर शहादत पर पुराना मौन जारी आज भी

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हर   शहादत  पर   पुराना  मौन जारी  आज  भी
सैनिकों  के  पीठ  पर  चलती कटारी   आज  भी

''देश  को   झुकने  नहीं  दूंगा'', ये दावा  आम  था
पर   हक़ीकत  है  यहाँ   दावे  पे' भारी  आज भी

तीन   सौ   सत्तर  हटी , ना  राम मंदिर   ही   बना
कल   मदारी  थे ,  वही  निकले मदारी  आज  भी

लूटकर   माल्या    भगा  , चंपत हुए   नीरव  कई,
दंग   हूँ   मैं    देखकर   काला बजारी  आज  भी

रेप , शोषण   और    हत्या  सुर्खियों   में  रोज  हैं
कुछ नहीं बदला यहाँ,सब कुछ है' जारी आज भी

                             - विनोद निर्भय 


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शुक्रवार, 8 जून 2018

तुम्हें अपना हृदय उसको दिखाना ही नहीं आया

तुम्हें अपना हृदय उसको दिखाना ही नहीं आया
मुहब्बत  है, मगर  होठों पे लाना  भी नहीं आया

कई अवसर  दिए  उसने  तुम्हें इज़हार  करने के,
मगर तुमको कोई अवसर भुनाना भी नहीं आया

यहाँ तो पीठ पीछे लोग क्या-क्या कह गुज़रते हैं,
तुम्हें अफ़वाह को हँसकर उड़ाना भी नहीं आया

अकेला कल  मुझे मझधार में तुम छोड़ आये थे,
सलीके  से  तुम्हें   बातें   बनाना भी  नहीं आया

तेरे   किरदार  में कोई  कमी दिखती नहीं 'निर्भय'
कमी  बस है, तुम्हें चर्चे  में आना ही नहीं  आया


                            
विनोद निर्भय 

बुधवार, 6 जून 2018

प्यार का रंग दिल पे चढा इस क़दर

प्यार का रंग दिल पे चढा इस क़दर
हर कहीं  आ  रही है मुझे वो नज़र
आजकल दिन गुज़रता नहीं है मेरा,
नींद   आती  नहीं  है  मुझे  रातभर

                       - विनोद निर्भय 


                 

मंगलवार, 5 जून 2018

गंगा विष में ढल रही, सूरज उगले आग

गंगा   विष   में  ढल   रही , सूरज उगले  आग
तप्त  हिमालय  हाँफता,  अब  तो प्राणी  जाग
अब तो  प्राणी  जाग, देख दुनिया   का   मंजर
बृक्षमुक्त    हैं    खेत  , और   धरती  है   बंजर
कह 'निर्भय'  समझाय , तभी तक जीवन चंगा
सहज-शुद्ध  हो  प्रकृति , धरा , माँ यमुना-गंगा


                               - विनोद निर्भय 

हमारे बीच सिलसिला क्या है

हमारे  बीच  सिलसिला  क्या  है|  नहीं  पता तो  फिर पता क्या है|| नसीब    आपका     पढा   हमने, कहो तो  बोल  दूँ लिखा  क्या है|  ...