शुक्रवार, 8 जून 2018

तुम्हें अपना हृदय उसको दिखाना ही नहीं आया

तुम्हें अपना हृदय उसको दिखाना ही नहीं आया
मुहब्बत  है, मगर  होठों पे लाना  भी नहीं आया

कई अवसर  दिए  उसने  तुम्हें इज़हार  करने के,
मगर तुमको कोई अवसर भुनाना भी नहीं आया

यहाँ तो पीठ पीछे लोग क्या-क्या कह गुज़रते हैं,
तुम्हें अफ़वाह को हँसकर उड़ाना भी नहीं आया

अकेला कल  मुझे मझधार में तुम छोड़ आये थे,
सलीके  से  तुम्हें   बातें   बनाना भी  नहीं आया

तेरे   किरदार  में कोई  कमी दिखती नहीं 'निर्भय'
कमी  बस है, तुम्हें चर्चे  में आना ही नहीं  आया


                            
विनोद निर्भय 

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