बुधवार, 16 जनवरी 2019

उद्धव-गोपी वार्तालाप


                  उद्धव संवाद 


जीव  मारा-मारा  फिरे , कभी मध्य कभी  तीरे,
जलधि  समान   प्रेम  , इस   पथ   जाओ  ना|
गये    छलपति   दूर , भूल   राग  ,  रास -  रंग,
राह देख  रात - दिन  , ख़ुद  को  सताओ  ना||
ब्रह्म  एकमात्र   सत्य , एक   मुक्ति  मार्ग  वही,
मोह - जाल त्याग बढो , ज़िन्दगी   गवाओ ना|
भेजे   यहाँ   कृष्ण  मुझे , खुल  गये भाग्य तेरे,
हित  की  बताऊँ बात ,  हँस  के उड़ाओ  ना||

                  गोपी संवाद 


गोपियाँ   अधीर   हुईं , नैन   भर   नीर  बोलीं, 
मदन - मुरारी   दिये ,  पत्र   तो   छुपाओ  ना|
मन   है  विभोर   आज , रोम - रोम  पुलकित, 
छोड़  के  प्रणय - गीत, और  कुछ  गाओ ना||
राग,तत्व,मौन , ध्यान , माया,काया  भाये नहीं,
माधो  जी ,  हमें  ये पाठ , ज्ञान के पढाओ ना|
ब्रह्मज्ञानी ,  दूर   जाओ , गाओ  कही निरगुण,
बिरह  की   नींद   हम   सोई  हैं  जगाओ ना||

                          


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