उद्धव संवाद
जीव मारा-मारा फिरे , कभी मध्य कभी तीरे,
जलधि समान प्रेम , इस पथ जाओ ना|
गये छलपति दूर , भूल राग , रास - रंग,
राह देख रात - दिन , ख़ुद को सताओ ना||
ब्रह्म एकमात्र सत्य , एक मुक्ति मार्ग वही,
मोह - जाल त्याग बढो , ज़िन्दगी गवाओ ना|
भेजे यहाँ कृष्ण मुझे , खुल गये भाग्य तेरे,
हित की बताऊँ बात , हँस के उड़ाओ ना||
गोपी संवाद
गोपियाँ अधीर हुईं , नैन भर नीर बोलीं,
मदन - मुरारी दिये , पत्र तो छुपाओ ना|
मन है विभोर आज , रोम - रोम पुलकित,
छोड़ के प्रणय - गीत, और कुछ गाओ ना||
राग,तत्व,मौन , ध्यान , माया,काया भाये नहीं,
माधो जी , हमें ये पाठ , ज्ञान के पढाओ ना|
ब्रह्मज्ञानी , दूर जाओ , गाओ कही निरगुण,
बिरह की नींद हम सोई हैं जगाओ ना||
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