बुधवार, 26 सितंबर 2018

इस तरफ आँधी,उधर सैलाब भी : मुक्तक

इस   तरफ   आँधी , उधर   सैलाब  भी|

और    नयनों   में  सुनहरा   ख़्वाब  भी||

आँख   का   पानी   मरा है   जब  कहीं,

सूख    जाते     हैं   नदी  -  तालाब  भी|


              - विनोद  'निर्भय'

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