भले-बुरे सारे अनुभव होते रंगों के जैसे ही
केवल एक रंग से तो जीवन में फाग नहीं फलता
सात रंग से मिलकर सूरज
रंग - कलश कहलाता|
भीग दिव्य किरणों से जिसके
धन्य जगत हो जाता||
दीपक से अँधियारा पिघले,कोहरा घोर नहीं छँटता
केवल एक रंग से तो जीवन में फाग नहीं फलता
मौसम के हैं रंग कई,
सबका जीवन से नाता|
कोई बर्षा के तो
कोई गुण बसंत के गाता||
पतझड़ से न गुज़रे उन वृक्षों पे बौर नहीं लगता
केवल एक रंग से तो जीवन में फाग नहीं फलता
बैठ गया प्रहलाद गोद में
नहीं ख़ौफ़ था मन में|
मगर होलिका जल जाती है
अपने द्वेष अगन में||
कहने को सन्मति जलती है,लेकिन सत्य नहीं जलता
केवल एक रंग से तो जीवन में फाग नहीं फलता
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