तक्षक मचा रहे हैं तांडव,
बीन बजाये आखिर कौन
तुम भी मौन......
कड़े चाक-चौबंध
परीक्षित तो करवाये
परीक्षित तो करवाये
द्वार-द्वार पर सिद्ध
सफेरे भी बैठाये
सफेरे भी बैठाये
मंदिर तक फूलों में
छिपकर आया कौन
छिपकर आया कौन
माली मौन...........
जन्मेजय है आज
पिता के ग़म में व्याकुल
पिता के ग़म में व्याकुल
सोच रहा वो युक्ति
निपटने का हर माकूल
निपटने का हर माकूल
नाग-भष्म करने का
मंत्र उचारे कौन
मंत्र उचारे कौन
पूछे मौन..........
हुआ परीक्षित जैसा भारत
शासक जन्मेजय सा
पाक हिंद पर श्राप और
तक्षक हत्यारों जैसा
चीख-चीखकर हारी
दर्द मिटाये कौन ?
घाटी मौन.......
चीख-चीखकर हारी
दर्द मिटाये कौन ?
घाटी मौन.......
पत्नी का सिंदुर लुटा
तो बच्चों की आशाएँ
तो बच्चों की आशाएँ
पूछ रही हैं वीर शहीदों
की लज्जित माताएँ
की लज्जित माताएँ
बिना लड़े सीमा पर
मरना चाहे कौन
मरना चाहे कौन
सब हैं मौन............
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