रविवार, 3 फ़रवरी 2019

नये चावल सरीखी क्लिष्ट है तासीर सपनों की....

नये  चावल  सरीखी क्लिष्ठ है  तासीर  सपनों की, 

हज़म  होते  नहीं  दोनों  ज़माने  को यहाँ अक्सर|


                                   - विनोद 'निर्भय'

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