पर्वत , नदिया ,पक्षी , झरने , सूरज , कलियाँ , शूल|
आख़िर कौन चितेरा इनका ,कौन सृजन का मूल||
पानी-खाद एक सा देते माली को देखा है|
धूप - छाँव में साथ डोलते डाली को देखा है||
आख़िर कौन चितेरा इनका ,कौन सृजन का मूल||
पानी-खाद एक सा देते माली को देखा है|
धूप - छाँव में साथ डोलते डाली को देखा है||
फिर भी क्यूँ बागों में खिलते भाँति-भाँति के फूल|
जाड़े में पड़ता है कितना भीषण गलन - कुहासा|
नल का गरम - गरम पानी देता है लेकिन आशा||
नल का गरम - गरम पानी देता है लेकिन आशा||
गर्मी में वापस हो जाता पानी कैसे कूल|
कोयल किसे रिझानेे ख़ातिर बोले मोहक वाणी|
सुध में किसकी झूमें धरती पहने चूनर धानी||
जाता किस ख़ुश्बू से भौरा अपनी हस्ती भूल|
सन्नाटे में झिलमिल नाद बजाने वाला कौन|
जुगनू में विद्युत का ताप जगाने वाला कौन||
जीव-जगत के हित में किसने गूथे व्यापक रुल|
जाता किस ख़ुश्बू से भौरा अपनी हस्ती भूल|
सन्नाटे में झिलमिल नाद बजाने वाला कौन|
जुगनू में विद्युत का ताप जगाने वाला कौन||
जीव-जगत के हित में किसने गूथे व्यापक रुल|
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