गुरुवार, 21 सितंबर 2017

तुम बिन सावन आना कैसा

तुम  बिन   सावन  आना  कैसा
फूलों  का   खिल   जाना  कैसा

इश्क़  वही  जो  रुह  को  छू ले
काया   का   छू    जाना   कैसा

मैं  तेरा    हमदम    हूँ  तो फिर,
क़ातिल    क्यूँ    बेगाना   कैसा

आज  तुम्हें    आना   ही  होगा,
मुझसे    शर्म  - बहाना    कैसा

हद  में   रहना   जिसको  भाये,
शम्मा    क्या    परवाना   कैसा

दिल हो जिसके वश में 'निर्भय'
शायर    क्या    दीवाना   कैसा

                 - विनोद निर्भय 

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