तुम बिन सावन आना कैसा
फूलों का खिल जाना कैसा
इश्क़ वही जो रुह को छू ले
काया का छू जाना कैसा
मैं तेरा हमदम हूँ तो फिर,
क़ातिल क्यूँ बेगाना कैसा
आज तुम्हें आना ही होगा,
मुझसे शर्म - बहाना कैसा
हद में रहना जिसको भाये,
शम्मा क्या परवाना कैसा
दिल हो जिसके वश में 'निर्भय'
शायर क्या दीवाना कैसा
- विनोद निर्भय
फूलों का खिल जाना कैसा
इश्क़ वही जो रुह को छू ले
काया का छू जाना कैसा
मैं तेरा हमदम हूँ तो फिर,
क़ातिल क्यूँ बेगाना कैसा
आज तुम्हें आना ही होगा,
मुझसे शर्म - बहाना कैसा
हद में रहना जिसको भाये,
शम्मा क्या परवाना कैसा
दिल हो जिसके वश में 'निर्भय'
शायर क्या दीवाना कैसा
- विनोद निर्भय
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