शोख़-चंचल हवा की रवानी हो तुम
एक दिलकश-हसीं रातरानी हो तुम
इस तरह से ख़ुदा ने तराशा तुम्हें
क्या कहूँ तुमसे कितनी सुहानी हो तुम
हर कोई चाहता है पढे ग़ौर से
सर से लेकर क़दम तक कहानी हो तुम
मुश्तहर हो ज़माने में तुम आजकल
हुश्न के मुल्क की राजधानी हो तुम
आज 'निर्भय' को तुझमें ख़ुदा मिल गया
लग रहा जैसे आँखों का पानी हो तुम

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