सीख जो बडों की नहीं गुनता - समझता है
वक़्त वही सीख उसे वक़्त पे सिखाता है
वक़्त न्यायी, वक़्त मित्र, वक़्त ही है सद्गुरू
वक़्त ही तो आदमी को आदमी बनाता है
फूल और शूल बन, आम या बबूल बन
अपने-पराये से वो परदा हटाता है
जिसका ईलाज नहीं मिलता है ढूँढने से
उसका ईलाज वैद्य वक़्त ही बताता है
वक़्त वही सीख उसे वक़्त पे सिखाता है
वक़्त न्यायी, वक़्त मित्र, वक़्त ही है सद्गुरू
वक़्त ही तो आदमी को आदमी बनाता है
फूल और शूल बन, आम या बबूल बन
अपने-पराये से वो परदा हटाता है
जिसका ईलाज नहीं मिलता है ढूँढने से
उसका ईलाज वैद्य वक़्त ही बताता है
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