दिखाने को भले ही ज़ख़्म पर मरहम लगाता है
मुझे लाचार जब देखे , नहीं फूला समाता है
तिकड़मी-जालसाज़ों की क़दर है आज दुनियाँ में,
खरी-खोटी वही सुनता यहाँ जो सच बताता है
मुझे लाचार जब देखे , नहीं फूला समाता है
तिकड़मी-जालसाज़ों की क़दर है आज दुनियाँ में,
खरी-खोटी वही सुनता यहाँ जो सच बताता है
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