सोमवार, 23 जुलाई 2018

कभी ख़ुद में उलझकर

कभी ख़ुद में उलझकर,दिल चटककर के बिखर जाता 

वहीं   ख़ुद  पे अगर  आए, नया  कुछ  कर दिखाता  है 




                                   - विनोद निर्भय 

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